प्रोटीन क्या है और इसके प्रकार

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प्रोटीन शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत, मांसपेशियों के निर्माण, एंज़ाइम और हार्मोन के निर्माण तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रोटीन शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत, मांसपेशियों के निर्माण, एंज़ाइम और हार्मोन के निर्माण तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रोटीन क्या है और इसके प्रकार

प्रोटीन हमारे शरीर के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है। यह अमीनो अम्लों (Amino Acids) से मिलकर बना एक जटिल कार्बनिक यौगिक है, जिन्हें शरीर के निर्माण खण्ड (Building Blocks) कहा जाता है। प्रोटीन शरीर की वृद्धि, ऊतकों की मरम्मत, मांसपेशियों के निर्माण, एंज़ाइम और हार्मोन के निर्माण तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वसा और कार्बोहाइड्रेट की तरह प्रोटीन शरीर में संग्रहित नहीं होता, इसलिए इसे प्रतिदिन भोजन से प्राप्त करना आवश्यक होता है।

प्रोटीन के प्रमुख स्रोत हैं—दूध, दही, पनीर, अंडा, दालें, सोयाबीन, मछली, चिकन, मेवा आदि।


प्रोटीन के प्रकार

प्रोटीन को विभिन्न आधारों पर कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है। इनके मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं—


1. पोषण के आधार पर (Based on Nutrition)

() अपूर्ण प्रोटीन (Incomplete Proteins)

इनमें एक या अधिक जरूरत के अमीनो अम्लों की कमी होती है।
स्रोत: अनाज, दालें, मेवा
(ध्यान रहे: दाल + चावल जैसे संयोजन पूर्ण प्रोटीन प्रदान करते हैं।

() पूर्ण प्रोटीन (Complete Proteins)

इनमें सभी आवश्यक अमीनो अम्ल पाए जाते हैं।
स्रोत: मांस, अंडा, दूध, सोया, मछली

2.     संरचना के आधार पर (Based on Structure)

() संयुक्त प्रोटीन (Conjugated Proteins)

ये प्रोटीन + किसी गैर-प्रोटीन तत्व से मिलकर बने होते हैं।
उदाहरण: हीमोग्लोबिन (प्रोटीन + आयरन), लाइपोप्रोटीन (प्रोटीन + वसा), ग्लाइकोप्रोटीन (प्रोटीन + कार्बोहाइड्रेट)

() रेशेदार प्रोटीन (Fibrous Proteins)

इनकी संरचना लंबी, रेशे जैसी होती है। ये पानी में अघुलनशील होते हैं और शरीर को मजबूती व संरचना प्रदान करते हैं।
उदाहरण: केराटिन (बाल और नाखून), कोलाजेन (त्वचा), मायोसिन (मांसपेशियाँ)

() गोलाकार प्रोटीन (Globular Proteins)

इनका आकार गोल या गोले जैसा होता है। ये पानी में घुलनशील होते हैं और शरीर के अधिकांश जैव-रासायनिक क्रियाओं में भाग लेते हैं।
उदाहरण: एंज़ाइम, एंटीबॉडी, हीमोग्लोबिन



3. कार्य के आधार पर (Based on Function)

() संरचनात्मक प्रोटीन – शरीर को आकार और मजबूती देते हैं

उदाहरण: कोलाजेन, केराटिन

() एंज़ाइमिक प्रोटीन – रासायनिक अभिक्रियाओं को तेज करते हैं

उदाहरण: एमाइलेज़, पेप्सिन

() परिवहन प्रोटीन – पदार्थों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाते हैं

उदाहरण: हीमोग्लोबिन, एल्ब्यूमिन

() हार्मोनल प्रोटीन – शरीर की क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं

उदाहरण: इंसुलिन, ग्रोथ हार्मोन

() प्रतिरक्षात्मक प्रोटीन – रोगों से रक्षा करते हैं

उदाहरण: एंटीबॉडी

() संकुचनशील प्रोटीन – शरीर की गति और मांसपेशियों के संकुचन में सहायक

उदाहरण: एक्टिन, मायोसिन


निष्कर्ष

प्रोटीन शरीर की वृद्धि, विकास, मरम्मत और कार्यप्रणाली के लिए अनिवार्य पोषक तत्व है। इसकी संरचना, पोषण और कार्य के आधार पर विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें रेशेदार, गोलाकार, संयुक्त, पूर्ण व अपूर्ण तथा क्रियात्मक प्रोटीन प्रमुख हैं। संतुलित आहार में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करके हम शरीर को स्वस्थ, मजबूत और ऊर्जावान बनाए रख सकते हैं।